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Showing posts from December, 2024

कुंभ मेला 12 वर्षों में एक बार लगता है

कुंभ मेला 12 वर्षों में एक बार लगता है लेकिन 12 वर्षों में ही क्यों लगता है ?  11 वर्षों में क्यों नहीं लगता ?  किसने निर्णय लिया था कि यह मेला 12 वर्षों पर लगा करेगा?  वास्तव में यह ऋषि मुनियों के एस्ट्रोलॉजी से निकला एक शुभ अवसर था जिस में उन्होंने बताया था कि इंसान की ज़िंदगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बृहस्पति ग्रह एक चक्कर क़रीब 12 वर्षों में लगाता है।   बृहस्पति ग्रह का हमारे भाग्य चमकाने में बहुत बड़ा हाथ होता है।  ख़ैर, असल बात तो ये है कि आदिकाल में ही ऋषियों ने कैसे गणना कर ली कि बृहस्पति ग्रह एक चक्कर 12 वर्षों में लगाता है?  उनको कैसे पता चला कि यह ग्रह है? क्या उन्होंने 12 सालों तक देखा ?  लेकिन देखेंगे किस चीज से ?  ग्रह की चाल (स्पीड) को मापने की विधि क्या थी ?  अब ऐसे प्रश्नों पर शोध करेंगे तो आज के विज्ञान की भारी बेइज़्ज़ती हो जाएगी। 🔶 कुंभ के 14 अखाड़े, जानें क्या है महत्व🔶 कुंभ का मेला विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में से एक है. लाखों की संख्या में लोग इस मेले में शामिल होते हैं. कुंभ का मेला हर 12 वर्षो...

नासिक

नासिक * नासिक शहर महाराष्ट्र में स्थित है और यहाँ उत्पादित अंगूर की मात्रा के कारण इसे भारत की वाइन राजधानी के रूप में जाना जाता है।  * यह मुंबई से लगभग 180 किमी और पुणे से लगभग 200 किमी दूर है।  * 'नापा घाटी' पश्चिमी घाट पर यह स्थित है। * नासिक पहले सातवाहन राजवंश की राजधानी थी।  * 16वीं शताब्दी के दौरान, यह शहर मुगल शासन के अधीन आ गया और इसे गुलशनाबाद कहा जाने लगा।  * उनसे यह पेशवाओं के पास चला गया, जिन्होंने अंततः 19वीं शताब्दी में इसे अंग्रेजों के हाथों खो दिया। * वीर सावरकर जैसे प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी नासिक से हैं।  * ऐसा माना जाता है कि भगवान राम ने 14 साल का वनवास नासिक के पास तपोवन नामक स्थान पर बिताया था।  * इसी स्थान पर भगवान लक्षण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी, और इसलिए इस स्थान को 'नासिक' कहा जाने लगा, जिसका अर्थ है नाक। * कालिदास और वाल्मीकि ने अपनी रचनाओं में नासिक का जिक्र किया है।  * 150 ईसा पूर्व के प्रसिद्ध दार्शनिक प्लॉटमी ने भी नासिक का जिक्र किया है।  * नासिक वर्तमान में महाराष्ट्र का सबसे तेजी से बढ़ता शहर है।  * बुनिया...

महाकुंभ जिला

महाकुंभ जिला  * उत्तर प्रदेश में महाकुंभ के आयोजन की तैयारी चल रही है. इस आयोजन के पहले एक बड़ी खबर सामने आयी है. महाकुंभ के आयोजन के लिए मेला क्षेत्र नया जिला घोषित कर दिया गया है. नए जिले का नाम महाकुंभ मेला रखा गया.  * महाकुंभ मेला नाम से नये जिले की अधिसूचना जारी कर दी गई है. इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में अब एक जिला बढ़ गया है.  * अब महाकुंभ तक यूपी में 75 नहीं बल्कि 76 जिले होंगे.  * कुंभ और अर्ध कुंभ के मौके पर नए जिले की अधिसूचना जारी किए जाने की परंपरा है.  * शासन के निर्देश पर प्रयागराज के डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ ने रविवार देर शाम नए जिले की अधिसूचना जारी की है.  * महाकुंभ मेला जिले में पूरा परेड क्षेत्र और चार तहसीलों सदर, सोरांव, फूलपुर और करछना के 67 गांव शामिल हैं. * महाकुंभ मेला जिले के कलेक्टर मेलाधिकारी विजय किरन आनंद होंगे.  * सभी श्रेणी के मुकदमों में कलेक्टर के समस्त अधिकारों का उपयोग करेंगे.  * अधिसूचना में कलेक्टर के सभी कार्य करने के अधिकार भी उन्हें दिए गए हैं.  * अधिसूचना के मुताबिक तहसील सदर के 25 गांव, तहसील सोर...

महाकुंभ सावधानी

महाकुंभ सावधानी  * प्रयागराज महाकुंभ 2025 में आने वाले करोड़ों भक्तों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर योगी सरकार तैयारियों में जुटी हुई है. सरकार के इस प्रयास को सफल बनाने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं. * प्रयागराज में इस समय महाकुंभ को लेकर तैयारियां चल रही हैं. आपको बता दें कि महाकुंभ का आयोजन हर 12 साल में एक बार होता है.  * सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर से लोग आते हैं. बड़े स्तर पर महाकुंभ का आयोजन किया जाता है. चूंकि यहां लाखों-करोड़ों की संख्या में लोग आते हैं. इसलिए यहां जाने से पहले कुछ प्लानिंग कर लेना बेहद जरूरी है. * आपकी यात्रा में किसी तरह की परेशानी न आए, इसलिए कुछ चीजों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है * कहीं भी जाने से पहले जरूरी दस्तावेज पहले ही संभाल लें. इससे आखिरी मौके पर भागम-भाग वाली स्थिती नहीं होगी.  * महाकुंभ जा रहे हैं तो अपना रजिस्ट्रेशन पहले ही करवा लें. आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से पंजीकरण करवा सकते हैं. इसके अलाव, आप आधार कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट जैसे जरूरी दस्तावेज अपने साथ रखें * यहां लोगों की संख्या ज्यादा आ सकती है. ऐसे में कंफर्...

कुंभ मेला

कुंभ मेला * महाकुंभ मेला को दुनिया का सबसे बड़ा मेला माना जाता है * शास्त्रों में कहा गया है कि महाकुंभ के पावन उत्सव में जो भी सम्मलित होकर पवित्र नदी में स्नान करता है उसे सारे जन्मों के पाप से मुक्ति मिलती है * भारत के 4 शहरों में इलाहाबाद, उज्जैन, नासिक और हरिद्वार में महाकुंभ का आयोजन किया जाता है * महाकुंभ के पीछे की कथा कि बात करें तो ऐसा माना जाता है कि देवताओं और असुरों के बीच हुए युद्ध में जब राहु और केतु अमृत के कलश को लेकर भागे थे तब अमृत की कुछ बूंदे इन्हीं चार पवित्र स्थानों पर गिरी थी * 12 वर्ष में इस उत्सव के आयोजन का विशेष महत्व है, कुंभ 12 तरह के होते हैं, जिसमें से चार धरती पर और आठ देवलोक में हैं, जो सिर्फ देवताओं को ही प्राप्त होते हैं * माघ माह में आयोजित होने वाले महाकुंभ का आयोजन इलाहाबाद (प्रयागराज) में होता है * प्रयाग में हिंदू धर्म से तीन पावन नदियों का समावेश होता है, जिसमें गंगा, यमुना और सरस्वती एक साथ बहती हैं इसे संगम कहते हैं * अगर हम UNESCO के आंकड़ों के हिसाब से देखें तो यहां पर मौजूद होने वालों की संख्या 10 करोड़ से ज्यादा होती है * शाही स्नान हिंदू स...

महाकुंभ के स्थान

महाकुंभ के स्थान  * कुंभ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने का अवसर भी देता है।  * धार्मित मान्यता के अनुसार कुंभ में स्नान करने से पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है। * यह धार्मिक आयोजन सामाजिक और सांस्कृतिक समागम का प्रतीक माना जाता है। * हिंदू संस्कृति और परंपराओं में कुंभ मेले का विशेष महत्व है।  * यह अद्वितीय मेला भारत के चार पवित्र स्थानों पर आयोजित किया जाता है।  * हालांकि, इसमें खगोलीय घटनाओं का भी गहरा प्रभाव माना जाता है। आइए जानते हैं किन दो ग्रहों की स्थिति के अनुसार स्थान का चयन किया जाता है। * महाकुंभ का आयोजन केवल चार स्थानों पर ही होता है, जिसमें प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, और उज्जैन शामिल हैं। * इसका चयन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर किया जाता है। * ज्योतिष के अनुसार, गुरु (बृहस्पति) और सूर्य की विशिष्ट राशियों में उपस्थिति के अनुसार तय होता है कि महाकुंभ किस स्थान पर आयोजित किया जाएगा। प्रयागराज महाकुंभ * जब गुरु वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में होते हैं, तो महाकु...

प्रयागराज नाम की कहानी

प्रयागराज नाम की कहानी  * शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि ''रेवा तीरे तप: कुर्यात मरणं जाह्नवी तटे।'' अर्थात, तपस्या करना हो तो नर्मदा के तट पर और शरीर त्यागना हो तो गंगा तट पर जाएं। गंगा के तट पर प्रयागराज, हरिद्वार, काशी आदि तीर्थ बसे हुए हैं। उसमें प्रयागराज का बहुत महत्व है। * प्रयाग का अर्थ : 'प्र' का अर्थ होता है बहुत बड़ा तथा 'याग' का अर्थ होता है यज्ञ। 'प्रकृष्टो यज्ञो अभूद्यत्र तदेव प्रयागः'- इस प्रकार इसका नाम 'प्रयाग' पड़ा। दूसरा वह स्थान जहां बहुत से यज्ञ हुए हों। * पृथ्वी को बचाने के लिए भगवान ब्रह्मा ने यहां पर एक बहुत बड़ा यज्ञ किया था। इस यज्ञ में वह स्वयं पुरोहित, भगवान विष्णु यजमान एवं भगवान शिव उस यज्ञ के देवता बने थे।  * तब अंत में तीनों देवताओं ने अपनी शक्ति पुंज के द्वारा पृथ्वी के पाप बोझ को हल्का करने के लिए एक 'वृक्ष' उत्पन्न किया। यह एक बरगद का वृक्ष था जिसे आज अक्षयवट के नाम से जाना जाता है। यह आज भी विद्यमान है। * इस देवभूमि का प्राचीन नाम प्रयाग ही था, लेकिन जब मुस्लिम शासक अकबर यहां आया और उसने इस जग...

प्रयागराज का इतिहास

प्रयागराज का इतिहास * हिंदू मान्यताओं के मुताबिक ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना से पहले यज्ञ करने के लिए धरती पर प्रयाग को चुना और इसे सभी तीर्थों में सबसे ऊपर, यानी तीर्थराज बताया।  * कुछ मान्यताओं के मुताबिक ब्रह्मा ने संसार की रचना के बाद पहला बलिदान यहीं दिया था, इस कारण इसका नाम प्रयाग पड़ा।  * संस्कृत में प्रयाग का एक मतलब 'बलिदान की जगह' भी है।  * पुराणों अनुसार प्राचीन समय में प्रयाग कोई नगर नहीं था बल्कि तपोभूमि और तीर्थ था।  * मान्यता अनुसार यह तीर्थ क्षेत्र लगभग 15 हजार ईसा पूर्व से विद्यामान है। यहां तीन हजार वर्षों से कुंभ का आयोजन होता आया है * कहते हैं कि यहां एक बस्ती थी जो भारद्वाज आश्रम के आसपास कहीं थी। पहले भारद्वाज आश्रम से झूंसी तक गंगा का क्षेत्र था। उस समय संगम कहीं चौक से पूर्व और दक्षिण अहियापुर में रहा था। फिर धीरे-धीरे इन नदियों के स्थान में परिवर्तन आया।  * अतरसुइया (अत्रि और अनसुइया) प्रयागराज का सबसे पुराना मोहल्ला है जो अकबर के समय से पहले से ही विद्यामान था। * खुल्दाबाद जहांगीर के समय में आबाद हुआ, दारागंज दाराशिकोह के नाम पर कायम हु...

कुंभ 12 साल पर ही क्यों?

कुंभ 12 साल पर ही क्यों? * कुंभ मेला भारतीय संस्कृति का एक अद्वितीय धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन माना जाता है।  * यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हर 12 वर्षों में विशेष रूप से चार स्थानों- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में आयोजित होता है।  * धार्मिक मान्यता के अनुसार इस आयोजन में पवित्र नदियों में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। *  लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह अद्वितीय आयोजन हर 12 साल बाद ही क्यों किया जाता है?  * दरअसल इस मेले के आयोजन के पीछे गहरी पौराणिक मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं... * मान्यता है कि कुंभ मेले की उत्पत्ति समुद्र मंथन की प्राचीन कथा से जुड़ी है।  * पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया था। *  अमृत कलश को लेकर देवताओं और असुरों के बीच 12 दिव्य दिनों तक संघर्ष चला था। ये 12 दिन पृथ्वी के 12 वर्षों के बराबर माने जाते हैं।  * कथा के अनुसार, इस दौरान अमृत की कुछ बूंदें 12 स्थानों पर गिरी थीं, जिनमें स...

त्रिवेणी संगम

त्रिवेणी संगम * गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी, गोदावरी, कृष्णा, सिंधु, क्षिप्रा, ब्रह्मपुत्र आदि सभी नदियों के अपने-अपने संगम है।  * हिंदू धर्म के तीन देवता हैं शिव, विष्णु और ब्रह्मा और तीन देवियां हैं पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती। इसीलिए सभी जगह त्रिवेणी का महत्व और बढ़ जाता है। * त्रिवेणी का अर्थ है वह स्थान जहां तीन नदियां आकर मिलती हों। जहां तीन नदियों का संगम होता हो। प्रयाग की गंगा नदी में एक स्थान ऐसा है जहां तीन नदियों का मिलन होता है।  * संगम और त्रिवेणी वस्तुत: एक ही स्थान है जहां गंगा, यमुना, सरस्वती का संगम होता है। यह दुर्लभ संगम विश्व प्रसिद्ध है।  * गंगा, यमुना के बाद भारतीय संस्कृति में सरस्वती को महत्व अधिक मिला है। * हिन्दू धर्म के अधिकतर तीर्थ नदियों के तट पर ही बसे हुए हैं। उसमें भी जहां तीन नदियों का संगम हो रहा है वह स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है।  * प्रयाग संगम पर गंगा और यमुना नदी अगल अलग नजर आती है, लेकिन कहते हैं कि उसी में सरस्वती भी मिली हुई है जो कि अलग नजर नहीं आती है।  * सरस्वती नदी के साथ अद्भुत ही बात है कि प्रत्यक्ष तौर पर सरस्वत...

देव स्नान या शाही स्नान

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शाही स्नान * महाकुंभ का आयोजन बड़े स्तर पर किया जाता है। इस महापर्व का साधु-संत बेसब्री से इंतजार करते हैं।  * इस बार महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी से हो रही है। वहीं, इसका समापन 26 फरवरी को होगा।  * प्रयागराज में शुरू होने जा रहा महाकुंभ का विशेष महत्व है, क्योंकि प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती का मिलन होता है। यह संगम विश्वभर में प्रसिद्ध है। * धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाकुंभ में स्नान करने से जातक को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी पापों से छुटकारा मिलता है। इसके अलावा विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।  * प्रयागराज में महाकुंभ में त्रिवेणी संगम के तट पर स्नान करने का विशेष महत्व है। इस त्रिवेणी संगम पर स्नान करने को शाही स्नान के नाम से जाता है।  * क्या आपको पता है कि त्रिवेणी संगम पर शाही स्नान किस कारण से किया जाता है? अगर नही पता, तो ऐसे चलिए आपको इसके महत्व के बारे में बताएंगे।  * हिंदू धर्म के लिए प्रयागराज का संगम बेहद पवित्र माना जाता है। प्रयागराज में गंगा- यमुना और सरस्वती नदी में होता है।  * प्रयागराज के संगम में गंगा, ...

संन्यासी

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संन्यासी * संन्यासी बनना कोई आसान प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है। * कोई व्यक्ति जब चेतना के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचता है तब वह संन्यासी कहलाता है।  * संन्यास का अर्थ है सांसारिक बन्धनों से मुक्त होकर निष्काम भाव से प्रभु का स्मरण करते रहना।  * शास्त्रों में संन्यास को जीवन की सर्वोच्च अवस्था कहा गया है। कितने प्रकार का होता है संन्यास * सनातन धर्म में जीवन को चार अवस्थाओं में विभाजित किया गया है बताई गई हैं जिनमें से संन्यास अंतिम अवस्था है। ये चार अवस्थाएं हैं- ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास।  * हिंदू धर्म में दो तरह के संन्यास होते हैं- विद्वत संन्यास और विद्विशा संन्यास क्या होता है विद्वत संन्यास * विद्वत संन्यास में व्यक्ति को जब लगता है कि अब जीवन में कुछ भी बाकी नहीं है तब वह व्यक्ति विद्या सन्यास की ओर अग्रसर होता है।  * इस प्रक्रिया में सबसे पहले व्यक्ति गुरु की खोज करता है सही गुरु के मिल जाने पर उनके सामने संन्यास लेने की इच्छा व्यक्त करता है।  * इसके बाद गुरु व्यक्ति को संन्यास की दीक्षा देते हैं जिसमें...

महाकुंभ से क्या लाएं

महाकुंभ से क्या लाएं * महाकुंभ में शाही स्नान का विशेष महत्व है।  * यह माना जाता है कि संगम में स्नान करने से न केवल जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, बल्कि मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।  * इसके अलावा, महाकुंभ से कुछ खास चीजें घर लाने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है। * महाकुंभ मेला 13 जनवरी 2025, सोमवार को पौष पूर्णिमा के साथ शुरू होगा और 26 फरवरी 2025, बुधवार को महाशिवरात्रि के साथ समाप्त होगा। * प्रयागराज में आयोजित होने वाले इस मेले में देश-विदेश के संत-महात्मा, नागा साधु और साध्वियां भाग लेंगे। * शाही स्नान का इस दौरान विशेष महत्व है, जिसे करने से आत्मिक शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।  महाकुंभ से लौटते समय घर के लिए ये चीजें जरूर लाएं:  1. पवित्र त्रिवेणी जल  * संगम में स्नान के बाद वहां का पवित्र जल अपने साथ घर लाना शुभ माना जाता है।  * गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम का जल घर की पवित्रता बढ़ाता है और नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है।  * यह जल परिवार के सुख-शांति और समृद्धि के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।...