प्रयागराज का इतिहास
प्रयागराज का इतिहास
* हिंदू मान्यताओं के मुताबिक ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना से पहले यज्ञ करने के लिए धरती पर प्रयाग को चुना और इसे सभी तीर्थों में सबसे ऊपर, यानी तीर्थराज बताया।
* कुछ मान्यताओं के मुताबिक ब्रह्मा ने संसार की रचना के बाद पहला बलिदान यहीं दिया था, इस कारण इसका नाम प्रयाग पड़ा।
* संस्कृत में प्रयाग का एक मतलब 'बलिदान की जगह' भी है।
* पुराणों अनुसार प्राचीन समय में प्रयाग कोई नगर नहीं था बल्कि तपोभूमि और तीर्थ था।
* मान्यता अनुसार यह तीर्थ क्षेत्र लगभग 15 हजार ईसा पूर्व से विद्यामान है। यहां तीन हजार वर्षों से कुंभ का आयोजन होता आया है
* कहते हैं कि यहां एक बस्ती थी जो भारद्वाज आश्रम के आसपास कहीं थी। पहले भारद्वाज आश्रम से झूंसी तक गंगा का क्षेत्र था। उस समय संगम कहीं चौक से पूर्व और दक्षिण अहियापुर में रहा था। फिर धीरे-धीरे इन नदियों के स्थान में परिवर्तन आया।
* अतरसुइया (अत्रि और अनसुइया) प्रयागराज का सबसे पुराना मोहल्ला है जो अकबर के समय से पहले से ही विद्यामान था।
* खुल्दाबाद जहांगीर के समय में आबाद हुआ, दारागंज दाराशिकोह के नाम पर कायम हुआ।
* कटरा औरगंजेब के समय में जयपुर के महाराजा सवाईसिंह ने बसाया था।
* बांध के नीचे गंगा, यमुना और सरस्वती का पवित्र संगम क्षेत्र जहां प्रतिवर्ष माघ में और छठवें तथा बारहवें वर्ष अर्द्धकुंभ और कुंभ के अवसर पर समग्र देश के विभिन्न अंचलों से करोड़ों लोग यहां स्नान के लिए आते हैं।
* ज्ञात इतिहास के अनुसार यह भू-भाग पर महाभारत काल के इन्द्रप्रस्थ की तरह विद्यमान रहा है जो 3000 ईसा पूर्व था।
* 600 ईसा पूर्व में वर्तमान प्रयागराज जिला के भागों को आवृत्त करता हुआ एक राज्य था। इसे 'कौशाम्बी' की राजधानी के साथ "वत्स" कहा जाता था। जिसके अवशेष आज भी प्रयागराज के पश्चिम में स्थित है।
* महात्मा गौतम बुद्ध ने इस पवित्र नगरी की तीन बार यात्राएं की थी। इससे सिद्ध होता है कि तब यह क्षेत्र एक नगर के रूप में विकसित था।
* इस क्षेत्र के मौर्य साम्राज्य के अधीन आने के पश्चात् कौशाम्बी को अशोक के प्रांतों में से एक का मुख्यालय बनाया गया था।
* उसके अनुदेशों के अधीन दो अखण्ड स्तम्भों का निर्माण कौशाम्बी में किया गया था। जिनमें से एक बाद में प्रयागराज स्थानांतरित कर दिया गया था।
* मौर्य साम्राज्य की पुरातन वस्तुएं एवं अवशेषों की खुदायी, जिले के एक अन्य महत्वपूर्ण स्थान भीटा से की गयी है।
* मौर्य के पश्चात् शुंगों ने वत्स या प्रयागराज क्षेत्र पर राज्य किया। यह प्रयागराज जिले में पाई गई शुंगकालीन कलात्मक वस्तुओं से सिद्ध होता है।
* शुंगों के पश्चात् कुषाण सत्ता में आए- कनिष्क की एक मुहर और एक अद्वितीय मूर्ति लेखन कौशाम्बी में पाई गई।
* कौशाम्बी, भीटा एवं झूंसी में गुप्त काल की वस्तुएं मिलता इसकी प्राचीनता का सिद्ध करता है।
* अशोक स्तम्भ के निकाय पर समुद्रगुप्त की प्रशस्ति की पंक्तियां खुदी हुई हैं जब कि झूंसी में वहां उसके पश्चात् नामित समुद्र कूप विद्यमान है। गुप्तों के पराभव पर प्रयागराज का भविष्य विस्मृत हो गया।
* हृवेनसांग ने 7वीं शताब्दी में प्रयागराज की यात्रा की थी और प्रयाग को मूर्तिपूजकों का एक महान शहर के रूप में वर्णित किया था।
* 1540 में शेरशाह हिन्दुस्तान का शासक बना। 1557 में झूंसी एवं प्रयाग के अधीन ग्राम मरकनवल में जौनपुर के विद्रोही गवर्नर और अकबर के मध्य एक युद्ध लड़ा गया था।
* विजय के उपरांत अकबर एक दिन में ही प्रयाग आया और वाराणसी जाने के पूर्व दो दिनों तक यहां विश्राम किया।
* अकबर वर्ष 1575 में पुनः प्रयाग आया और एक शाही शहर की आधारशिला रखी। जिसे उसने इलाहाबास कहा।
* अकबर के शासन के अधीन नवीन शहर तीर्थयात्रा का अपेक्षित स्थान हो गया था।
* वर्तमान में प्रयागराज भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक महत्वपूर्ण जिला है
प्रयागराज (इलाहाबाद)
* प्रयागराज को ही इलाहाबाद के नाम से जाना जाता है
* प्रयागराज भारत के उत्तर प्रदेश का एक शहर और जिला है
* प्रयागराज में गंगा और यमुना का संगम स्थित है
* प्रयागराज एक प्राचीन नगर और हिंदू धर्म के अनुयायियों का बहुत बड़ा तीर्थ स्थल है
* प्रयागराज को ही पहले इलाहाबाद और इससे पहले प्रयाग के नाम से जाना जाता था
* इसे बादशाह अकबर ने अलहाबाद नाम दिया था
* उत्तर प्रदेश सरकार ने 16 अक्टूबर 2018 को कैबिनेट की मंजूरी के द्वारा अधिसूचना जारी कर इलाहाबाद का नाम बदलकर फिर से प्रयागराज कर दिया
* प्रयागराज का वर्णन रामायण और महाभारत में भी मिलता है
* मुगलों के राज में विशेष महत्व रखने वाले इस नगर में राजकुमार सलीम कुछ दिन बिताए थे जिनकी याद में यहां खुसरो बाग बनाया गया
* 1885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना इलाहाबाद में हुई थी
* 1920 में अहिंसा आंदोलन की शुरुआत महात्मा गांधी ने इलाहाबाद से की थी
* ब्रिटिश काल में इलाहाबाद पश्चिमोत्तर प्रांत का मुख्यालय था
* पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा में इस शहर की पवित्रता को देखते हुए इसे तीर्थराज का नाम दिया
* प्रयागराज वह जगह है जहां हर 12 वर्ष पर महाकुंभ का आयोजन होता है
* प्रयागराज में उत्तर प्रदेश का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय है
* इलाहाबाद में उत्तर प्रदेश का उच्च न्यायालय है जिसकी बेंच लखनऊ में है
* प्रयागराज के कुछ प्रसिद्ध मंदिर पतालपुरी मंदिर, हनुमान मंदिर, बड़े हनुमान जी मंदिर, शिवकोटी महादेव मंदिर, अलोपी देवी मंदिर, कल्याणी देवी मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, नागवासुकी मंदिर, बेनी महादेव मंदिर आदि
* प्रयागराज में ब्रिटिश और मुगलकाल की कई निशानियां हैं जैसे इलाहाबाद किला, मिंटो पार्क, अल्फ्रेड पार्क, थाॅर्नहिल मेन मेमोरियल और खुसरो बाग प्रमुख है
* अल्फ्रेड पार्क वह जगह जहां चंद्रशेखर आजाद शहीद हुए थे और यह शहर का सबसे हरा भरा स्थान है
* इलाहाबाद विश्वविद्यालय भारत में अंग्रेजी भाषा का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है
* इलाहाबाद अंग्रेजी शासन काल में 1861 से 1918 तक उत्तर प्रदेश की राजधानी थी
* इलाहाबाद अपने खास लाल चित्तीदार इलाहाबादी अमरूद के लिए भी मशहूर है
* शहर के यमुना नदी पर बना केबल ब्रिज शहर का लैंडमार्क बन गया है
* इलाहाबाद का आनंद भवन भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु की राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियों का साक्षी है
* 12 फरवरी 1948 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अस्थियां प्रयागराज में प्रवाहित की गई
* इलाहाबाद में रेल सड़क और हवाई यातायात मौजूद है यहां घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से मार्च है
* इलाहाबाद के प्रसिद्ध व्यक्ति
> हरिवंश राय बच्चन
> महादेवी वर्मा
> मोतीलाल नेहरू
> जवाहरलाल नेहरू
> मुरली मनोहर जोशी
> अमिताभ बच्चन
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