महाकुंभ के स्थान
महाकुंभ के स्थान * कुंभ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने का अवसर भी देता है। * धार्मित मान्यता के अनुसार कुंभ में स्नान करने से पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है। * यह धार्मिक आयोजन सामाजिक और सांस्कृतिक समागम का प्रतीक माना जाता है। * हिंदू संस्कृति और परंपराओं में कुंभ मेले का विशेष महत्व है। * यह अद्वितीय मेला भारत के चार पवित्र स्थानों पर आयोजित किया जाता है। * हालांकि, इसमें खगोलीय घटनाओं का भी गहरा प्रभाव माना जाता है। आइए जानते हैं किन दो ग्रहों की स्थिति के अनुसार स्थान का चयन किया जाता है। * महाकुंभ का आयोजन केवल चार स्थानों पर ही होता है, जिसमें प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, और उज्जैन शामिल हैं। * इसका चयन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर किया जाता है। * ज्योतिष के अनुसार, गुरु (बृहस्पति) और सूर्य की विशिष्ट राशियों में उपस्थिति के अनुसार तय होता है कि महाकुंभ किस स्थान पर आयोजित किया जाएगा। प्रयागराज महाकुंभ * जब गुरु वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में होते हैं, तो महाकु...