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Showing posts from February, 2026

सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 मध्य प्रदेश

कुंभ की कथा पुराणों के अनुसार देवों और दानवों सहयोग से सम्पन्न समुद्र मंथन से अन्य वस्तुओं के अलावा अमृत से भरा हुआ एक कुंभ (घडा) भी निकला था। देवगण दानवों को अमृत नहीं देना चाहते थे। देवराज इंद्र के संकेत पर उनका पुत्र जयन्त जब अमृत कुंभ लेकर भागने की चेष्टा कर रहा था, तब कुछ दानवों ने उसका पीछा किया। अमृत-कुंभ के लिए स्वर्ग में बारह दिन तक संघर्ष चलता रहा और उस कुंभ से चार स्थानों पर अमृत की कुछ बूंदें गिर गईं। यह स्थान पृथ्वी पर हरिद्वार,प्रयाग, उज्जैन और नासिक थे। इन स्थानों की पवित्र नदियों को अमृत की बूंदे प्राप्त करने का श्रेय मिला। क्षिप्रा के पावन जल में अमृत-सम्पात की स्मृति में सिंहस्थ महापर्व उज्जैन में मनाया जाता है। अय स्थानों पर भी यह पर्व कुंभ-स्नान के नाम से मनाया जाता है। कुंभ के नाम से यह पर्व अधिक प्रसिध्द है। प्रत्येक स्थान पर बारह वर्षों का क्रम एक समान हैं अमृत-कुंभ के लिए स्वर्ग की गणना से बारह दिन तक संघर्ष हुआ था जो धरती के लोगों के लिए बारह वर्ष होते हैं। प्रत्येक स्थान पर कुंभ पर्व कोफ्लिए भिन्न-भिन्न ग्रह सिषाति निश्चित है। उज्जैन के पर्व को लिए सिंह रा...

नासिक कुंभ मेला 2027 तिथियां

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नासिक कुंभ मेला 2027 तिथियां: शाही स्नान और पूर्ण कार्यक्रम यह नासिक कुंभ मेला 2027 के लिए आपकी मार्गदर्शिका है, जो हर 12 साल में एक बार होने वाला एक पवित्र आयोजन है। यह क्या है:   एक 'सिंहस्थ' कुंभ, जो तब होता है जब बृहस्पति ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करता है, जिससे गोदावरी नदी असाधारण रूप से पवित्र हो जाती है। मुख्य आयोजन:   अमृत स्नान (या शाही स्नान), पवित्र स्नान। तीर्थयात्रियों के लिए आध्यात्मिक शुद्धि हेतु स्नान करने का यह सबसे शुभ समय है। महत्वपूर्ण तिथियां:   स्नान करने की तीन सबसे महत्वपूर्ण तिथियां   2 अगस्त, 31 अगस्त और 11/12 सितंबर, 2027  हैं । अद्वितीय स्थान:   यह मेला दो पवित्र स्थानों पर आयोजित होता है:  वैष्णव अनुयायियों के लिए  नासिक (रामकुंड)   और  शैव अनुयायियों के लिए  त्र्यंबकेश्वर   (एक ज्योतिर्लिंग स्थल)। कुंभ पर्व का समय मानव निर्मित पंचांगों पर निर्भर नहीं है; यह ग्रहों द्वारा निर्धारित एक दिव्य संयोग है। नासिक में होने वाले इस आयोजन को 'सिंहस्थ' कहा जाता है, और यही नाम...