Posts

Showing posts from April, 2021

अधिदेवता, प्रत्यधि देवता, पञ्चलोकपाल देवता

अधिदेवता, प्रत्यधि देवता, पञ्चलोकपाल देवता   अधिदेवता ईश्वर ( सूर्य के दायें भाग मे ) ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्  । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्  ।। उमा  ( चन्द्रमा के दायें भाग मे ) ॐ श्रीश्च ते लक्ष्मीश्च पत्न्यावहोरात्रे पार्श्वे नक्षत्राणि रूपमश्विनौ व्यात्तम्  ।  इष्णन्निषाणामुं म ईशाण सर्वलोकं म ईशाण  ।       स्कन्द ( मङ्गल के दायें भाग मे ) यदक्रन्दः प्रथमं जायमान उद्यन्त्समुद्रादुत वा पुरीषात्  । शयेनस्य पक्षा हरिणस्य बाहू उपस्तुत्यं महि जातं ते अर्वन्  ।। विष्णु  ( बुध के दायें भाग मे ) ॐ विष्णोरराटमसि विष्णोः श्नप्त्रे स्थो विष्णोः स्युरसि विष्णोर्ध्रुवोऽसि  ।  वैष्णवमसि विष्णवे त्वा  ।। ब्रह्मा  ( बृहस्पति के दायें भाग मे ) ॐ ब्रह्म यज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्विसीमतः सुरुची वेन आवः  । सबुध्न्या  उपमा  अस्य  विष्ठाः सतश्चयोनिमसतश्चविवः  ।। इन्द्र ( शुक्र के दायें भाग मे ) ॐ सजोषा इन्द्र सगणो मरुद्भिः सोमं पिब वृत्रहा शूर विद्वान्  ...

01. पञ्चांग परिचय (तिथि, वार, नक्षत्र, करण, योग)

पञ्चांग परिचय (तिथि, वार, नक्षत्र, करण, योग) ।। श्री गणेशाय नमः ।। "तिथि वारं च नक्षत्रं योगं करणमेव च । पञ्चान्गस्य फलं श्रुत्वा गंगा स्नानं फलं लभेत् ।।" "यथा शिखा मयूराणाम नागानां मणयो यथा । तद्व्वेदांग शास्त्राणाम ज्योतिषां मूर्ध्निस्थितां ।।"    तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण से पञ्चांग बनता है । तिथि :- शुक्ल पक्ष:- कृष्ण पक्ष:- प्रतिपदा-१ द्वितीया-२ तृतीया-३ चतुर्थी-४ पञ्चमी-५ षष्ठी-६ सप्तमी-७ अष्टमी-८ नवमी-९ दशमी-१० एकादशी-११ द्वादशी-१२ त्रयोदशी-१३ चतुर्दशी-१४ पूर्णिमा-१५ प्रतिपदा-१६ द्वितीया-१७  तृतीया-१८ चतुर्थी-१९  पञ्चमी-२०  षष्ठी-२१  सप्तमी-२२  अष्टमी-२३  नवमी-२४  दशमी-२५  एकादशी-२६  द्वादशी-२७  त्रयोदशी-२८  चतुर्दशी-२९  अमावस्या-३० वार :- रविवार-१ सोमवार-२ मंगलवार-३ बुधवार-४ वीरवार-५ शुक्रवार-६ शनिवार-७ “ जिस दिन की प्रथम होरा का जो ग्रह स्वामी होता है उस दिन का वही वार होता है। शनि, गुरु, मंगल, रवि, शुक्र, बुध, चन्द्रमा । आकाश मंडल में इन ग्रहों की कक्षा एक दुसरे से नीचे मानी गयी है । एक ...