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Showing posts from November, 2024

कुंभ का प्रचार खर्च दो पैसे का रहस्य

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कुंभ का प्रचार खर्च दो पैसे का रहस्य मालवीय जी के दो पैसे के रहस्य ने वायसराय को कर दिया हैरान। प्रयागराज (पूर्व में इलाहाबाद) के क्षेत्रीय अभिलेखागार में रखे एक दस्तावेज से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आता है। इन दस्तावेजों से यह साफ पता चलता है कि कुंभ मेला कभी अंग्रेजों के लिए सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक राजस्व का स्रोत भी था।  इस लेख में हम आपको प्रयागराज महाकुंभ के एक ओर दिलचस्प किस्सा के बारे में जानकारी दें रहे हैं। यह किस्सा 1942 के प्रयागराज महाकुंभ से जुड़ा है।  इसी मेले के दौरान भारत के तत्कालीन वायसराय जनरल लॉर्ड लिनलिथगो, पंडित मदनमोहन मालवीय के साथ कुंभ मेले का अवलोकन करने जा पहुंचे। जब वायसराय ने देखा कि लाखों लोग अलग-अलग वेशभूषाओं में त्रिवेणी स्नान और भजन-पूजन कर रहे हैं तो उसको यह दृश्य हैरान और परेशान कर गया।  इतने बड़े आयोजन को देखकर वायसराय के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई और उन्होंने मालवीय जी से पूछा, " इतनी भीड़ ! इसके प्रचार पर कितना खर्च होता होगा ?" इस पर मालवीय जी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "मात्र दो पैसे।"  वायसरा...

अब से 142 साल पहले कुंभ का खर्च

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अब से 142 साल पहले कुंभ का खर्च  बात 1882 के प्रयागराज कुंभ की है जिसे अंग्रेजों ने अब से 142 साल पहले 20 हजार में रूपए में संपन्न किया था और इससे अंग्रेजी सरकार को हुआ था 29,612 रुपए का लाभ। कैसे ? जानने के लिए विस्तृत जानकारी पढ़ें – यह मेला आज केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का भी प्रतीक बन चुका है। हालांकि, इसके पीछे छिपी ऐतिहासिक और राजनीतिक कहानी भी उतनी ही अद्वितीय है, जितना इसका धार्मिक महत्व।  मौजूदा समय में जहां कुंभ मेले का आयोजन करने में जहां अरबों रुपये खर्च किए जाते हैं, वहीं इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि एक समय था जब यह मेला अंग्रेजी हुकूमत के लिए एक महत्वपूर्ण राजस्व का स्रोत हुआ करता था। प्रयागराज (पूर्व में इलाहाबाद) के क्षेत्रीय अभिलेखागार में रखे एक दस्तावेज से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आता है। इस दस्तावेज में 1882 के प्रयागराज के महाकुंभ  मेले के लाभ और खर्च के बीच के संबंधों को विस्तार से बताया गया है। उस समय के उत्तर-पश्चिम प्रांत के सचिव एआर रीड ने कुंभ मेले की व्यवस्था और उसके लाभ के विवरण पर एक र...

महाकुंभ 2025

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इस बार #महाकुंभ में 488 किलोमीटर अस्थाई सड़क और 30 से 35 अस्थाई पीपा पुल बनाएंगे.....  मेला क्षेत्र के विशेष कार्य भी तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। वही 2,69,000 चेकर्ड प्लेटों की आपूर्ति पूरी हो चुकी है।वहीं, 3308 पाण्टून का उपयोग करते हुए 30 पाण्टून पुलों का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। इसी तरह, 488 किमी अस्थाई सड़कों की योजना को भी क्रियान्वित किया जा रहा है। वहीं, 148 पार्किंग क्षेत्रों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है #प्रयागराज #वाली #महाकुम्भ2025