कुंभ मेला

कुंभ मेला
* महाकुंभ मेला को दुनिया का सबसे बड़ा मेला माना जाता है
* शास्त्रों में कहा गया है कि महाकुंभ के पावन उत्सव में जो भी सम्मलित होकर पवित्र नदी में स्नान करता है उसे सारे जन्मों के पाप से मुक्ति मिलती है
* भारत के 4 शहरों में इलाहाबाद, उज्जैन, नासिक और हरिद्वार में महाकुंभ का आयोजन किया जाता है
* महाकुंभ के पीछे की कथा कि बात करें तो ऐसा माना जाता है कि देवताओं और असुरों के बीच हुए युद्ध में जब राहु और केतु अमृत के कलश को लेकर भागे थे तब अमृत की कुछ बूंदे इन्हीं चार पवित्र स्थानों पर गिरी थी
* 12 वर्ष में इस उत्सव के आयोजन का विशेष महत्व है, कुंभ 12 तरह के होते हैं, जिसमें से चार धरती पर और आठ देवलोक में हैं, जो सिर्फ देवताओं को ही प्राप्त होते हैं
* माघ माह में आयोजित होने वाले महाकुंभ का आयोजन इलाहाबाद (प्रयागराज) में होता है
* प्रयाग में हिंदू धर्म से तीन पावन नदियों का समावेश होता है, जिसमें गंगा, यमुना और सरस्वती एक साथ बहती हैं इसे संगम कहते हैं
* अगर हम UNESCO के आंकड़ों के हिसाब से देखें तो यहां पर मौजूद होने वालों की संख्या 10 करोड़ से ज्यादा होती है
* शाही स्नान हिंदू संतों और नागा साधुओं के स्नान को कहा जाता है, ऐसा माना जाता है कि नागा साधू हिन्दू धर्म के रक्षक होते हैं इसी कारण शाही स्नान के पहले किसी को भी उस नदी में स्नान की अनुमति नहीं होती
* महाकुंभ के दौरान सबसे पहला स्नान नागा साधुओं द्वारा करने के बाद ही आम इंसानों को स्नान करने की अनुमति दी जाती है
* इलाहाबाद में हर साल माघ मेले का आयोजन किया जाता है जो की मकर संक्रांति के दिन से शुरू होकर महा शिवरात्रि तक रहता है
* अर्ध कुम्भ का आयोजन 6 सालों में एक ही बार होता है जिसके बाद महाकुंभ के आयोजन की मान्यता है जो 12 सालों में एक बार पड़ता है
* कुंभ का आयोजन क्यों होता है, इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, लेकिन तमाम हिन्दू धार्मिक ग्रन्थों में इसका वर्णन मिलता है
* चीनी मुसाफिर और इतिहासकार हुएनत्सांग के किस्से और कहानियो में भी इस मेले का जिक्र मिलता है
* ऐसी मान्यता है की संगम के तट पर ही ऋषि भारद्वाज का आश्रम बना हुआ है, जिसमें भगवान राम, भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ वनवास के समय आकर रुके थे
* प्राचीनकाल में शंकराचार्य और चैतन्य महाप्रभु भी कुम्भ दर्शन को गए थे
* कुम्भ मेला लोगों की धार्मिक आस्थाओं की गहराई और विश्वास का प्रतीक है
* बूढ़े हो या जवान, बीमार हो या तंदुरुस्त, सभी पवित्र गंगा में डुबकी लगाने आते हैं, जिसे हिंदू एक नदी की बजाए एक देवी की तरह पूजते हैं
* सरलतम शब्दों में कुंभ का अर्थ है ‘एक घड़ा’, पर इस शब्द का अर्थ अधिक गहरा है कुंभ – समुद्र, पृथ्वी, मानव शरीर, सूरज और विष्णु का पर्याय है। यह इसलिए, क्योंकि समुन्दर, नदियों, तालाब को धरती घेरे रहती है


महाकुंभ 
* हिंदू धर्म में कुंभ मेले को बहुत ही खास माना जाता है।
* कुंभ की भव्यता और मान्यता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं, कि कुंभ में स्नान करने के लिए लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। 
* अगला महाकुंभ, प्रयागराज इलाहाबाद में आयोजित होने जा रहा है। 
* इसका आयोजन केवल सिर्फ प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में ही होता है। 
* जिसके पीछे एक पौराणिक कथा मिलती है। चलिए जानते हैं इस बारे में।
* महाकुंभ की पौराणिक कथा समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार, जब एक बार राक्षसों और देवताओं के बीच समुद्र मंथन हुआ, तो इस दौरान मंथन से निकले सभी रत्नों को आपस में बांटने का फैसला हुआ। 
* सभी रत्न को राक्षसों और देवताओं ने आपसी सहमति से बांट लिए, लेकिन इस दौरान निकले अमृत के लिए दोनों पक्षों के बीच युद्ध छिड़ गया।
* ऐसे में असुरों से अमृत को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अमृत का पात्र अपने वाहन गरुड़ को दे दिया। 
* असुरों ने जब देखा कि अमृत गरुड़ से पास है, तो वह इसे छीनने का प्रयास करने लगे। 
* इस छीना-झपटी में अमृत की कुछ बूंदें धरती की चार जगहों पर यानी प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरी। 
* जहां-जहां यह बूंदे गिरी थी आज वहीं पर 12 सालों के अंतराल में कुंभ मेले का आयोजन होता है।
* समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और राक्षसों के बीच अमृत पाने को लेकर 12 दिनों तक लड़ाई चली थी। 
* वही शास्त्रों के अनुसार, देवताओं के बारह दिन मनुष्य के बारह वर्षों के समान होते हैं। इसलिए महापर्व कुंभ प्रत्येक स्थल पर बाहर वर्ष बाद लगता है। 
* वहीं 12 साल में कुंभ लगने का एक कारण बृहस्पति ग्रह की गति को भी माना जाता है, जो इस प्रकार है -
> जब बृहस्पति ग्रह, वृषभ राशि में हों और इस दौरान सूर्य देव मकर राशि में आते हैं, तो कुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज में होता है।
> इसी तरह जब बृहस्पति, कुंभ राशि में हों और इस दौरान सूर्य देव मेष राशि में आते हैं, तो कुंभ आयोजन हरिद्वार में होता है।
> सूर्य और बृहस्पति जब सिंह राशि में हों तब महाकुंभ मेला नासिक में लगता है।
> जब देवगुरु बृहस्पति सिंह राशि में हों और सूर्य मेष राशि में हों, तो कुंभ का मेला उज्जैन लगता है।

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