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Showing posts from January, 2021

पहली बार हरिद्वार में 12 साल की बजाए 11वें साल में आयोजित होगा।

कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक कार्यक्रम है. भारत में हर 12वें वर्ष हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में इसका आयोजन किया जाता है. हालांकि, कुंभ मेले के इतिहास में पहली बार ये पहली बार हरिद्वार में यह 12 साल की बजाए 11वें साल में आयोजित होगा. 2022 में लगने वाला कुंभ मेला इस साल हरिद्वार में होने वाला है, क्योंकि ग्रह-गोचर चल रहे हैं. कुंभ मेला की तैयारियां अंतिम चरण में है. इस वर्ष कुंभ मेला हरिद्वार में लगने जा रहा है. कुंभ का मेला इस वर्ष 11वें साल बाद पड़ रहा है. 12 साल में कुंभ मेले का आयोजन होता है, लेकिन साल 2022 में गुरु, कुंभ राशि में नहीं होंगे. इसलिए इस बार 11वें साल में कुंभ का आयोजन हो रहा है. इस वर्ष 11 मार्च 2021 में शिवरात्रि के अवसर पर कुंभ मेला का पहला शाही स्नान आयोजित किया जाएगा. कुंभ मेला का तीसरा शाही स्नान 14 अप्रैल 2021 को मेष संक्रांति के अवसर पर होगा दरअसल अमृत योग का निर्माण काल गणना के अनुसार होता है. जब कुंभ राशि का गुरु आर्य के सूर्य में परिवर्तित होता है. अर्थात गुरु, कुंभ राशि में नहीं होंगे. इसलिए इस बार 11वें साल में कुंभ का आयोजन...

कुंभ स्पेशल 2021

कुम्भ इस साल मात्र डेढ़ महीने का होगा कुंभ मेले में कुल चार शाही स्नान होंगे. पहला शाही स्नान 11 मार्च को महाशिवरात्रि के मौके पर होगा तो दूसरा शाही स्नान 12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या पर, तीसरा शाही स्नान 14 अप्रैल को संक्राति के अवसर पर और चौथा शाही स्नान 27 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के दिन होगा. कोरोना की वजह से साढ़े तीन महीने तक चलने वाला कुम्भ इस साल मात्र डेढ़ महीने का होगा. हरिद्वार में इस साल होने जा रहा कुंभ का आयोजन साढ़े तीन महीने के बजाय केवल 48 दिन का ही होगा। कोरोना की वजह से 11 मार्च से 27 अप्रैल तक ही कुम्भ मेला चलेगा। हर की पौड़ी के घाट पर और आसपास के घाटों पर निर्माण का काम लगभग पूरा हो चुका है. सीढ़ियों पर पत्थर लगे हैं, आसपास साफ सफाई का काम हो रहा है, गंगा नदी पर स्थायी और अस्थाई पुल बन चुके हैं, पेंटिंग का काम चल रहा है, गंगा की साफ सफाई की जा चुकी है. गंगा नदी के ऊपर एक नहीं बल्कि थोड़ी थोड़ी दूरी पर अस्थाई पुल बनाये गए हैं. अभी पुलों को भगवा रंग में रंगा गया है. इन पुलों पर ऐसे इंतज़ाम होंगे कि एक तरफ से लोग आएं और दूसरी तरफ से निकल जाएं. घाटों पर स्टील के केबिन बनाये गए ...

वर्ष 1915 के कुंभ में हरिद्वार में राचा इतिहास।

पिछली शताब्दी में वर्ष 1915 के कुंभ मेले में हरिद्वार की इस धरती पर दो ऐसे पन्ने लिखे गए, जो हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो गए। इतिहास के इन पन्नों का नाता भारतरत्न महामना मदन मोहन मालवीय के नाम से जुड़ा हुआ है। बात तब की है जब हरिद्वार में ब्रिटिश सरकार द्वारा गंगा पर बांध का निर्माण किया जा रहा था। इसके खिलाफ 1014 से पंडा समाज यह कहते हुए आंदोलन कर रहा था कि बंधे जल में अस्थि प्रवाह एवं अन्य कर्मकांड शास्त्रीय दृष्टि से वर्जित हैं। पुरोहितों के आंदोलन का नेतृत्व महामना मदन मोहन मालवीय कर रहे थे। 1915 में जब कुंभ लगा तो महामना ने कुंभ में आए राजा महाराजाओं का सहयोग लेने के लिए हरिद्वार में डेरा जमा दिया था। बताते हैं कि छोटे-बड़े 25 नरेश उस कुंभ में गंगा स्नान के लिए आए थे। महामना और पुरोहितों ने तीर्थत्व की रक्षा के लिए राजाओं को बांध विरोधी आंदोलन में भाग लेने के लिए राजी कर लिया। कुंभ के बाद बांध विरोधी आंदोलन ने जोर पकड़ा और कई रियासतों ने बांध का कार्य रोकने के लिए अपनी सेनाएं हरिद्वार भेज दी। यह आंदोलन अगले वर्ष तक चला। बाद में ब्रिटिश सरकार और पुरोहितों के बीच वह ऐतिह...

अखाड़ा परिषद ने जारी की ढोंगियों की सूची, ना पड़ें इन 14 फर्जी बाबाओं के चक्कर में!

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अखाड़ा परिषद ने जारी की ढोंगियों की सूची, ना पड़ें इन 14 फर्जी बाबाओं के चक्कर में! इन फर्जी बाबाओं से रहें सावधान! इलाहाबाद । पिछले कुछ वर्षों में धर्मगुरु बने बैठे ढोंगी बाबाओं का तांडव सभी ने देखा है. ताजा मामला डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह का है. साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी पाए जाने के बाद डेरा समर्थकों ने हरियाणा में काफी उपद्रव किया था. इस घटना के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ कि आखिर किस तरह के बाबाओं का अनुसरण किया जाए. इसी के मद्देनजर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने आज संगमनगरी में अपनी विशेष बैठक में 11 फर्जी बाबाओं की सूची जारी की है. इनमें डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत राम रहीम, राधे मां, आसाराम बापू व निर्मल बाबा सहित 11 के नाम हैं. परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सभी 13 अखाड़ों के प्रमुख शामिल हुए। यहां देखिए फर्जी बाबाओं की पूरी लिस्ट   1- आसाराम बापू उर्फ आशुमल शिरमलानी  2- सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां 3- सच्चिदानंद गिरि उर्फ सचिन दत्ता 4- गुरमीत सिंह राम रहीम सच्चा डेरा, सिरसा। 5- ओम बाबा उर्फ विवेकानंद झा ...

2021 हरिद्वार महाकुंभ की प्रमुख स्नान तिथियां।

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2021 हरिद्वार महाकुंभ की प्रमुख स्नान तिथियां। मकर संक्रांति के पहले स्नान के साथ ही हरिद्वार में 2021 के महाकुंभ का आगाज हुआ। यह महाकुंभ 14 जनवरी मकर संक्रांति से हरिद्वार में आयोजित होने जा रहा है। इसके साथ ही कुंभ मेले का आगाज भी हो गया है।  इस साल कुंभ मेले की शुरुआत 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति से हो रही है. कुंभ मेला हिंदुओं के सबसे शुभ और सबसे बड़े अनुष्ठानों में से एक है।और अप्रैल 2021 तक जारी रहेगा. उम्मीद की जा रही है कि कुंभ मेले के दौरान पवित्र गंगा में डुबकी लगाने के लिए लाखों भक्त इकट्ठे होंगे. गंगा स्नान का महत्व शास्त्रों के अनुसार जो भी व्यक्ति कुंभ मेले के दौरान गंगा में स्नान करता है तो उन्हें मोक्ष प्राप्त होता हैं. और कहते हैं कि सभी पाप और रोगों से मुक्ति मिल जाती है. आपको जानकारी देना चाहेंगे कि इस साल कुंभ मेले के दौरान 4 शाही स्नान होंगे और इसमें 13 अखाड़े भाग लेंगे. इन अखाड़ों से झांकी निकाली जाएंगी. इस झांकी में सबसे आगे नागा बाबा होंगे और महंत, मंडलेश्वर, महामंडलेश्वर और आचार्य महामंडलेश्वर नागा बाबाओं का अनुसरण करेंगे इस वर्ष 14 अप्रैल को मेष...

हरिद्वार कुंभ 2021 तिथियां

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हरिद्वार कुंभ 2021 भारत रत्न मदन मोहन मालवीय जी द्वारा स्थापित श्री गंगा सभा के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार उत्तराखंड सरकार ने सभी प्रमुख अखाड़ों से चर्चा के बाद हरिद्वार कुंभ 2021 के शाही स्नान और प्रमुख स्नानों की तारीखें घोषित कर दी हैं। हरिद्वार कुंभ 2021 का पहला शाही स्नान   महाशिवरात्रि, दिन गुरुवार, 11 मार्च को होगा। इस रहेगी।  शाही स्नान की प्रमुख तिथियां -  गुरुवार, 11 मार्च 2021 महाशिवरात्रि,  सोमवार, 12 अप्रैल सोमवती अमावस्या,  बुधवार, 14 अप्रैल मेष संक्रांति और वैशाखी,  मंगलवार, 27 अप्रैल चैत्र माह की पूर्णिमा। प्रमुख स्नान के दिन -  गुरुवार, 14 जनवरी 2021 मकर संक्रांति,  गुरुवार, 11 फरवरी मौनी अमावस्या,  मंगलवार, 16 फरवरी बसंत पंचमी,  शनिवार, 27 फरवरी माघ पूर्णिमा,  मंगलवार, 13 अप्रैल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (हिन्दी नववर्ष),  बुधवार, 21 अप्रैल राम नवमी। कुंभ से जुड़ी प्राचीन मान्यता कुंभ के संबंध में समुद्र मंथन की कथा प्रचलित है। इस कथा के अनुसार प्राचीन समय में एक बार महर्षि दुर्वासा के शाप की वज...