प्रयागराज नाम की कहानी

प्रयागराज नाम की कहानी 
* शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि ''रेवा तीरे तप: कुर्यात मरणं जाह्नवी तटे।'' अर्थात, तपस्या करना हो तो नर्मदा के तट पर और शरीर त्यागना हो तो गंगा तट पर जाएं। गंगा के तट पर प्रयागराज, हरिद्वार, काशी आदि तीर्थ बसे हुए हैं। उसमें प्रयागराज का बहुत महत्व है।
* प्रयाग का अर्थ : 'प्र' का अर्थ होता है बहुत बड़ा तथा 'याग' का अर्थ होता है यज्ञ। 'प्रकृष्टो यज्ञो अभूद्यत्र तदेव प्रयागः'- इस प्रकार इसका नाम 'प्रयाग' पड़ा। दूसरा वह स्थान जहां बहुत से यज्ञ हुए हों।
* पृथ्वी को बचाने के लिए भगवान ब्रह्मा ने यहां पर एक बहुत बड़ा यज्ञ किया था। इस यज्ञ में वह स्वयं पुरोहित, भगवान विष्णु यजमान एवं भगवान शिव उस यज्ञ के देवता बने थे। 
* तब अंत में तीनों देवताओं ने अपनी शक्ति पुंज के द्वारा पृथ्वी के पाप बोझ को हल्का करने के लिए एक 'वृक्ष' उत्पन्न किया। यह एक बरगद का वृक्ष था जिसे आज अक्षयवट के नाम से जाना जाता है। यह आज भी विद्यमान है।
* इस देवभूमि का प्राचीन नाम प्रयाग ही था, लेकिन जब मुस्लिम शासक अकबर यहां आया और उसने इस जगह के हिंदू महत्व को समझा, तो उसने इसका नाम 1583 में बदलकर 'अल्लाह का शहर' रख दिया। 
* मुगल बादशाह अकबर के राज इतिहासकार और अकबरनामा के रचयिता अबुल फज्ल बिन मुबारक ने लिखा है कि 1583 में अकबर ने प्रयाग में एक बड़ा शहर बसाया और संगम की अहमियत को समझते हुए इसे 'अल्लाह का शहर', इल्लाहावास नाम दे दिया
* जब भारत पर अंग्रेज राज करने लगे तो रोमन लिपी में इसे 'अलाहाबाद' लिखा जाने लगा, जो बाद में बिगड़कर इलाहाबाद हो गया।
* परन्तु इस सम्बन्ध में एक मान्यता और भी है कि 'इला' नामक एक धार्मिक सम्राट, जिसकी राजधानी प्रतिष्ठानपुर थी, के वास के कारण इस जगह का नाम 'इलावास' पड़ा, जो अब झूसी है। कालान्तर में अंग्रेज़ों ने इसका उच्चारण इलाहाबाद कर दिया।
* हालांकि यह भी कहा जाता है कि अकबर ने हिंदू एवं मुस्लिम दोनों धर्मो को मिलाकर एक नया धर्म चलाया था जिसका नाम उसने 'दीनेइलाही' रखा। 
* कहते हैं कि इस प्रकार 'इलाही' जहां पर 'आबाद' हुआ वह इलाहाबाद कहलाया। तभी से प्रयाग को इलाहाबाद के नाम से जाना जाता रहा है। 
* वर्तमान में राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 16 अक्टूबर 2018 को कैबिनेट की मंजूरी के द्वारा अधिसूचना जारी कर इसका नाम बदलक वही प्राचीन नाम कर दिया है- प्रयागराज।

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