आलौकिक एवं महादिव्य 'कुम्भ-महापर्व-प्रयागराज' (29 जनवरी 2025 ई.)
आलौकिक एवं महादिव्य 'कुम्भ-महापर्व-प्रयागराज' (29 जनवरी, 2025 ई.) [कुम्भपर्व का उद्गम, माहात्म्य, स्नान तिथियां एवं स्नानविधि आदि] [लेखक : पं. विवेक शर्मा] कुम्भ महापर्व' एवं कुम्भ मेला भारतवर्ष का सबसे बड़ा मेला है। यह महापर्व भारत की प्राचीन गौरवमयी वैदिक संस्कृत्ति एवं सभ्यता का प्रतीक है। इस महापर्व के अवसर पर समस्त भारतवर्ष से ही नहीं, अपितु विश्व के अनेक देशों से करोड़ों की संख्या में धर्मपरायण श्रद्धालु लोग भारत के चारों तीथों में से किसी एक तीर्थ पर पवित्र व पुण्य स्नान, दान, जपादि हेतु इकट्ठे होकर भव्य एवं विराट उत्सव का समायोजन करते हैं। 'कुम्भ' शब्द का अर्थ है घर या घड़ा और 'कुम्भ' का अर्थ विश्व ब्रह्माण्ड भी है। जहाँ पर विश्वभर के धर्म, जाति, भाषा, संस्कृति, महात्माओं एवं सामान्य श्रद्धालुजनों का समागम हो, वही कुम्भ महापर्व कहलाता है। कुम्भ-पर्व के सम्बन्ध में वेद-पुराणों में अनेक महत्त्वपूर्ण मन्त्र एवं प्रसंग मिलते हैं, जिनसे सिद्ध होता है कि कुम्भ-महापर्व अत्यन्त प्राचीन, प्रामाणिक एवं वैदिक धर्म से ओत-प्रोत है। 'ऋग्वेद' के दशम मण्डल क...