अब से 142 साल पहले कुंभ का खर्च
अब से 142 साल पहले कुंभ का खर्च
बात 1882 के प्रयागराज कुंभ की है जिसे अंग्रेजों ने अब से 142 साल पहले 20 हजार में रूपए में संपन्न किया था और इससे अंग्रेजी सरकार को हुआ था 29,612 रुपए का लाभ।
कैसे ? जानने के लिए विस्तृत जानकारी पढ़ें –
मौजूदा समय में जहां कुंभ मेले का आयोजन करने में जहां अरबों रुपये खर्च किए जाते हैं, वहीं इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि एक समय था जब यह मेला अंग्रेजी हुकूमत के लिए एक महत्वपूर्ण राजस्व का स्रोत हुआ करता था।
प्रयागराज (पूर्व में इलाहाबाद) के क्षेत्रीय अभिलेखागार में रखे एक दस्तावेज से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आता है। इस दस्तावेज में 1882 के प्रयागराज के महाकुंभ मेले के लाभ और खर्च के बीच के संबंधों को विस्तार से बताया गया है।
उस समय के उत्तर-पश्चिम प्रांत के सचिव एआर रीड ने कुंभ मेले की व्यवस्था और उसके लाभ के विवरण पर एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें जॉइंट मैजिस्ट्रेट विल्सन द्वारा भेजी गई एक रिपोर्ट भी शामिल थी, जिसमें अस्पताल, पेयजल व्यवस्था, रास्ते और शिविरों की विस्तृत जानकारी दी गई थी।
एआर रीड की इस रिपोर्ट के अनुसार 1882 में हुए कुंभ मेले से जुड़े आंकड़े दर्शाते हैं कि उस समय मेले के आयोजन पर 20,228 रुपये रख हुए थे, जबकि सरकार ने इस खर्चे से कुल 49,840 रुपए की आमदनी की थी। इस धन को राजकोष में जमा कर दिया गया। इन दोनों अंतरों से हम पाते है कि सरकार को (49,840 रुपए – 20,228 रुपए = 29,612 रुपए) 29,612 रुपए का लाभ हुआ।
अब सवाल यह उठता है कि यह लाभ कहां गया? क्या यह सिर्फ सरकारी खजाने तक सीमित रहा? नहीं, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि मेले से प्राप्त आय का उपयोग इलाहाबाद शहर के विकास कार्यों में किया गया। जिससे शहर की कई सुविधाओं का निर्माण हुआ।
इस प्रकार 1882 में प्रयागराज के महाकुंभ मेला के अद्भुत स्थल संगम पर जहां लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था और भक्ति से ओतप्रोत होकर पुण्य की गंगा में डुबकी लगाई। वहीं इस अनूठे मेले की भव्यता और इसके प्रबंधन से जुड़े रहस्यमय पहलुओं ने इसे विश्वभर में अलग पहचान दिलाई है।
लेखक
ॐ जितेन्द्र सिंह तोमर
17.47/3/27/11/2024
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