कुंभ स्पेशल 2021

कुम्भ इस साल मात्र डेढ़ महीने का होगा

कुंभ मेले में कुल चार शाही स्नान होंगे. पहला शाही स्नान 11 मार्च को महाशिवरात्रि के मौके पर होगा तो दूसरा शाही स्नान 12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या पर, तीसरा शाही स्नान 14 अप्रैल को संक्राति के अवसर पर और चौथा शाही स्नान 27 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के दिन होगा. कोरोना की वजह से साढ़े तीन महीने तक चलने वाला कुम्भ इस साल मात्र डेढ़ महीने का होगा.
हरिद्वार में इस साल होने जा रहा कुंभ का आयोजन साढ़े तीन महीने के बजाय केवल 48 दिन का ही होगा। कोरोना की वजह से 11 मार्च से 27 अप्रैल तक ही कुम्भ मेला चलेगा।

हर की पौड़ी के घाट पर और आसपास के घाटों पर निर्माण का काम लगभग पूरा हो चुका है. सीढ़ियों पर पत्थर लगे हैं, आसपास साफ सफाई का काम हो रहा है, गंगा नदी पर स्थायी और अस्थाई पुल बन चुके हैं, पेंटिंग का काम चल रहा है, गंगा की साफ सफाई की जा चुकी है. गंगा नदी के ऊपर एक नहीं बल्कि थोड़ी थोड़ी दूरी पर अस्थाई पुल बनाये गए हैं. अभी पुलों को भगवा रंग में रंगा गया है. इन पुलों पर ऐसे इंतज़ाम होंगे कि एक तरफ से लोग आएं और दूसरी तरफ से निकल जाएं. घाटों पर स्टील के केबिन बनाये गए हैं जहां स्नान के बाद महिलाएं कपड़े चेंज कर सकती हैं.

हरिद्वार में इस बार हर तरफ भगवा दिखाई देगा

हरिद्वार में इस बार हर तरफ भगवा दिखाई देगा. गंगा नदी के ऊपर बने पुल को पूरी तरह भगवा रंग में रंगा गया है. पुलों पर रंग बिरंगी आकृतियां और भगवान की तस्वीरें गंगा के घाटों के आसपास के दृश्य बेहद भव्य होंगे. हर बार कुम्भ में करोड़ों लोग नदियों के किनारे इकट्ठे होते हैं. हरिद्वार में प्रयाग की तरह खुली हुई जगह नहीं है. इसलिए हरिद्वार के चंडी घाट पर नया घाट बनाया गया है. केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत बनाये गए चंडी घाट पर भी स्नान के मुकम्मल इंतज़ाम हैं जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को हर की पौड़ी की जगह चंडी घाट पर स्नान कराकर आगे भेजा जा सकता है.

कुम्भ में जिस जगह साधु संतों के टेंट लगते हैं, उस जगह जब एबीपी न्यूज़ की टीम ने पड़ताल की तो पाया कि चंडी देवी मंदिर की पहाड़ी के सामने स्थित खाली जगह पर अबतक कोई तैयारी नहीं दिखाई दे रही है. सिर्फ बिजली के खम्भे मौके पर लगे हैं. ना तार लग पाया है, न ट्रांसफॉर्मर, न शौचालय और न टेंट. इसी वजह से साधु संत सरकार की तैयारियों से बेहद नाराज हैं.

दीवारों पर रंग बिरंगी पेंटिंग दिखाई देगी

शहर में आने वाले हर शख्स जब किसी सड़क या गली से गुज़रेगा तो उसे दीवारों पर रंग बिरंगी पेंटिंग दिखाई देगी. ये पेंटिंग बनाने का काम आर्ट्स के स्टूडेंट्स को दिया गया है. दिल्ली से आई ज्योति और प्रीति ने बताया कि वो एक साल से इस काम मे जुटी हुई हैं. बीच में कोरोना की वजह से काम थोड़ा रुका था लेकिन अब उनके साथ के छात्र लगकर पेंटिंग बनाने का काम कर रहे हैं. समुद्र मंथन और भगवान भोले शंकर की तस्वीरें बनाने में लगीं ज्योति और प्रीति ने बताया कि कई जगहों पर काम पूरा हो चुका है और कुछ काम बाक़ी है जिसको जल्दी जल्दी पूरा किया जा रहा है. ज्योति ने कहा कि प्रयागराज में कुम्भ का जीवन, साधु संत, भगवान की तस्वीरें और बाकी तस्वीरें उकेरी थीं. इस साल भी यही कोशिश है कि सुंदर तस्वीर बनाई जाए. प्रीति ने कहा कि ये काम चुनौती है लेकिन काम करने अच्छा लग रहा है और साथ ही काम में नया अनुभव मिल रहा है. इस बार स्प्रे पेंटिंग बनाकर गुणवत्ता का ज़्यादा ख़्याल रखा जा रहा है.

शास्त्रों के अनुसार कुम्भ राशिस्थ के समय जिस दिन सूर्यदेव मेष राशि में प्रवेश करते हैं, उस दिन हरिद्वार में कुम्भपर्व मनाया जाता है। इस वर्ष (संवत्सर 2078 में) 13 अप्रैल 2021 को भारतीय समयानुसार अर्द्धरात्रि के बाद 2 बजकर 33 मिनट पर सूर्यदेव मेष राशि में प्रविष्ट होंगे।इस समय बृहस्पति कुम्भ राशि में होगा जोकि 5 अप्रैल 2021 को कुम्भ राशि में प्रवेश कर चुका होगा।अतः शास्त्रानुसार 14 अप्रैल 2021 को हरिद्वार में कुम्भ-महापर्व पर गंगा-स्नान,दान,जप का मुख्य पुण्यकाल होगा। *मेष की संक्रांति का पुण्यकाल 14 अप्रैल 2021 को हरिद्वार में मध्यान्ह अर्थात 12:18 बजे तक रहेगा। यद्यपि संक्रांति का पुण्यकाल 16 घड़ी(6 घंटे 24 मिनट) पहिले और 16 घड़ी बाद में माना जाता है।अतएव एक मतानुसार 14 अप्रैल 2021 को संक्रान्ति प्रवेश 6 घंटे 24 मिनट बाद प्रातः 8:57 बजे तक गंगा स्नान-जप-दान का विशेष महत्व रहेगा।

कुंभ में पहला शाही स्नान, इन 24 तारीखों का रखें ध्यान

हरिद्वार में कुंभ की शुरुआत 14 जनवरी से हो रही है। पहला शाही स्नान आज मकर संक्रान्ति पर है। यह 26 मई को समाप्त होगा। इस दौरान मकर संक्रांति से लेकर बसंत पंचमी तक कई खास तिथियां हैं जिस दिन शाही स्नान होगा। आइए आप भी जानें कुंभ में होने वाले शाही स्नान की 24 तारीखें।

शास्त्रों के अनुसार कुम्भ राशिस्थ के समय जिस दिन सूर्यदेव मेष राशि में प्रवेश करते हैं, उस दिन हरिद्वार में कुम्भपर्व मनाया जाता है। इस वर्ष (संवत्सर 2078 में) 13 अप्रैल 2021 को भारतीय समयानुसार अर्द्धरात्रि के बाद 2 बजकर 33 मिनट पर सूर्यदेव मेष राशि में प्रविष्ट होंगे।इस समय बृहस्पति कुम्भ राशि में होगा जोकि 5 अप्रैल 2021 को कुम्भ राशि में प्रवेश कर चुका होगा।अतः शास्त्रानुसार 14 अप्रैल 2021 को हरिद्वार में कुम्भ-महापर्व पर गंगा-स्नान,दान,जप का मुख्य पुण्यकाल होगा। *मेष की संक्रांति का पुण्यकाल 14 अप्रैल 2021 को हरिद्वार में मध्यान्ह अर्थात 12:18 बजे तक रहेगा। यद्यपि संक्रांति का पुण्यकाल 16 घड़ी(6 घंटे 24 मिनट) पहिले और 16 घड़ी बाद में माना जाता है।अतएव एक मतानुसार 14 अप्रैल 2021 को संक्रान्ति प्रवेश 6 घंटे 24 मिनट बाद प्रातः 8:57 बजे तक गंगा स्नान-जप-दान का विशेष महत्व रहेगा।

स्नान, जप, पाठ, तर्पण का विशेष लाभ

परन्तु अन्य मतानुसार यदि आधी रात से पूर्व संक्रांति हो,तो पहले दिन उत्तरार्द्ध(तीसरे पहर से) में पुण्यकाल होता है तथा यदि अर्द्ध रात्रि के उपरांत संक्रांति प्रवेश हो तो दूसरे दिन का पूर्वार्द्ध( दिन का प्रथम अर्द्धभाग) पुण्यकाल होगा। शास्त्र-निर्देशों के अनुसार प्रमुख शाही स्नान दिनाँक 14 अप्रैल 2021 मेष संक्रांति के पुण्य काल में सूर्योदय से पहले अरुणोदयकाल से लेकर मध्यान्ह 12:18 बजे तक रहेगा।अतः इस काल में स्नान,जप,पाठ,तर्पण आदि का विशेष लाभ मिलेगा।

हरिद्वार कुम्भ-महापर्व की पुण्य स्नान तिथियां निम्न होंगी:-

1. मकर सक्रांति(14 जनवरी 2021,गुरुवार):- इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रातः 8:41बजे प्रवेश करेंगे।यह निरयण उत्तरायण दिन है।अतएव यह दिन संक्रमण काल होने से स्नान-दान के लिए पुण्यदायक होता है।इस दिन कुम्भ-स्नान पर्व का श्रीगणेश किया जाएगा।यह कुम्भ-महापर्व का प्रथम प्रमुख स्नान पर्व होगा।

2.पौष पूर्णिमा(28 जनवरी 2021,गुरुवार):- इस दिन गुरुपुष्य योग भी होने के कारण यह दिन स्नान-दान के लिये अति महत्वपूर्ण है।

3.मौनी अमावस्या(महोदय योग)(11 फ़रवरी, गुरुवार):- इस दिन "महोदय" नामक योग अपराह्न 2:05 बजे तक होने से स्नान का माहात्म्य और भी बढ़ जाएगा।इस दिन कुम्भ-स्नान,तर्पण, श्राद्ध का विशेष माहात्म्य होगा।इस दिन स्नान-दान का माहात्म्य सूर्यग्रहण के समान माना गया है।

4.फाल्गुन संक्रांति(12 फरवरी 2021,शुक्रवार)

5.बसंत पंचमी(16 फरवरी 2021,मंगलवार):- तृतीय प्रमुख स्नान पर्व तिथि इस दिन माँ सरस्वती व लक्ष्मी पूजन का दिन होने के कारण विशेष शुभ है।

6.आरोग्य (रथ ) सप्तमी(19 फरवरी 2021,शुक्रवार):- इस दिन स्वस्थ शरीर की कामना हेतु गंगा में स्नान कर भगवान सूर्य का पूजन अर्ध्य देकर बहाना चाहिये।इस दिन विशेष समय सूर्योदय पूर्व अरुणोदय काल है।

7.भीष्माष्टमी(20 फरवरी 2021,शनिवार):-इस दिन कुम्भ-महापर्व के शुभ अवसर पर गंगा-स्नान के पश्चात बाल ब्रह्मचारी भीष्म पितामह का श्राद्ध अथवा तर्पण करने से अभीष्ट सिद्धि तथा गुणवान संतति की प्राप्ति होती है।

8.माघी-पूर्णिमा(27 फरवरी 2021,शनिवार):- चतुर्थ महान "प्रमुख स्नान पर्व" इस दिन माघी पूर्णिमा की पवित्र तिथि है। मघा नक्षत्र से संबंधित होने के कारण इस मास का नाम माघ पड़ा।इस नक्षत्र के अधिष्ठातृ देवता "पितर-गण" हैं।माघ स्नान का अनुष्ठान करने वाले के लिए यह आवश्यक है कि पौष पूर्णिमा को स्नान कर "माघ" व्रत का प्रारम्भ करें और माघ पूर्णिमा को स्नान कर व्रत का समापन करें।इस दिन कुम्भपर्व का मुख्य स्नान समय "अरुणोदयकाल" जोकि सूर्योदय से लगभग 1 घंटा 36 मिनट पहले रहता है।

9. महाशिवरात्रि व्रत दिवस(11 मार्च 2021,गुरुवार, प्रथम शाही स्नान):- यह कुम्भ महापर्व का विशेष स्नान का दिन है।इस दिन शाही-स्नान का समय प्रातः 4:19 बजे से मध्यान्ह 12:18 बजे तक रहेगा। इस दिन गंगा-स्नान के उपरान्त शिव पूजन करना अत्यंत शुभ एवं पुण्यदायी होगा।संध्या काल में(प्रदोष काल) में पुनः स्नान करके चार पहर रात्रि पर्यन्त भगवान शिव का पूजन करने से महापुण्य प्राप्त होता है।

10.फाल्गुन(शनैश्चरी)अमावस्या(13 मार्च 2021,शनिवार):-अमावस्या पितरों की तिथि होने के कारण कुम्भपर्व की स्नान तिथि पर गंगा-स्नान के पश्चात पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।शनिवारी फाल्गुन अमावस्या होने के कारण कुम्भपर्व पर स्नान हेतु विशेष पुण्यदायी होगी।

11.चैत्र संक्रांति(14 मार्च 2021,रविवार):- इस दिन पुण्यकाल पूर्वाह्न 11:39 बजे के बाद से पूरे दिन रहेगा।

12.महाविशुव दिन(20 मार्च 2021,शनिवार):-

13.वारुणी पर्व(8/9 अप्रैल 2021):- इस दिन 8 अप्रैल 2021 की मध्य रात्रि के बाद 3:16 बजे से 4:57 बजे तक वारुणी योग रहेगा।इस योग में गंगा-स्नान आदि का फल सौ सूर्यग्रहण के समान माना गया है।

14.चैत्र अमावस्या/सोमवती अमावस्या(12 अप्रैल 2021,सोमवार:- इस दिन कुम्भपर्व का दूसरा शाही स्नान होगा।

15.चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नवरात्र एवं नव संवत्सर(13 अप्रैल 2021,मंगलवार):- यह कुम्भपर्व के स्नान की विशेष तिथि है।

16.मेष संक्रान्ति पुण्यकाल(14 अप्रैल 2021,बुधवार):- संक्रांति प्रवेश काल मध्य रात्रि के बाद होने से संक्रांति पुण्यकाल अगले दिन तक रहेगा। इस दिन कुम्भपर्व स्नान करने से सहस्त्रों अश्वमेघ यज्ञ करने से, सैकड़ो वाजपेय यज्ञ करने से और लाख बार पृथ्वी की प्रदक्षिणा करने से जो फल प्राप्त होता है, वह पुण्य फल केवल कुम्भपर्व स्नान से प्राप्त होता है।

17.श्री रामनवमी(21 अप्रैल 2021,बुधवार):- मर्यादा पुरुषोत्तम राम की जन्मतिथि के दिन स्नान-जप आदि के लिए अत्यंत शुभ है।यह तिथि कुम्भपर्व की पंचम प्रमुख स्नान की तिथि है।

18.चैत्र पूर्णिमा(27 अप्रैल 2021,मंगलवार):- इस दिन से वैशाख माह स्नान प्रारम्भ हो जाएगा।

19.वैशाख(भौमवती अमावस्या,11 मई,मंगलवार):-

20.अक्षय तृतीया, भगवान परशुराम जयंती(14 मई 2021,शुक्रवार):-

21.जेष्ठ संक्रांति(14 मई 2021,शुक्रवार):- सूर्य संक्रमण काल स्नान-दान-जप आदि हेतु अत्यंत पुण्यप्रद है।

22.आद्य गुरु शंकराचार्य जयंती(17 मई 2021,सोमवार):-

23.श्री गंगा-जयंती(18 मई 2021,मंगलवार):- इस दिन मध्यान्ह व्यापिनी गंगा-जयंती होने के कारण गंगा-स्नानादि का समय मध्यान्ह 12:33 बजे से सन्ध्या काल तक रहेगा।

24.वैशाखी पूर्णिमा(26 मई 2021,बुधवार):- यह हरिद्वार के कुम्भ महापर्व की अंतिम स्नान तिथि होगी।यहां कुम्भ महापर्व की समाप्ति होगी।


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